Friday, 18 September 2015

हकीकत से मुलाकात


साभार:गूगल

वो एहसासों की गुफ़्तगू ...वो तुम्हारे आने की तपिश
समन्दर की आती लहरें जैसे पैरो को छू रही हैं...
तुमको पाने की एक आशा जैसे इन्ही लहरो के साथ वापस जा रही
तुम से बढ़कर कोई विस्वास न था...तुमसे बढ़कर कोई आवाज न थी
भ्रमित सी थी मै एक अनजान ख्यालों की दुनिया में
तुम्ही से थी वाबस्ता ये जिंदगी मेरी
तुम्ही से तो थी हर आरजू मेरी
कश के मुट्ठियाँ भींच लेते थे तुम जब डर से जाते थे
मेरे इसी आँचल में छिप से जाते थे
करवट लेगा कुछ वक़्त ऐसा
कभी क्या सोचा था हमने ऐसा
अब एक नयी जिंदगी में तुम खुश हो
और शायद मै भी खुश ही हूँ..
अब शायद ये कुछ बीते वक़्त की बाते हैं
जिंदगी की हकीकत से कुछ मुलाकाते हैं.....